ट्रम्प बोले-पूरी सभ्यता खत्म होगी, ईरान ने कहा, ऐसा जबाब देेंगे, जिसे भूल नहीं सकोगे
अमेरिका-इस्त्राइल ने ईरान में बुनियादी ढ़ाचों पर हमले शुरू किये, दो पुलों-रेलवे स्टेशन को बनाया निशाना
ईरान ने बातचीत के सभी रास्ते किये बंद कहा-1.4करोड़ लोग मरने के लिए तैयार
न्यूयार्क टाइम्स न्यूज सर्विस/एजेंसी।
वांशिगटन/दुबई/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टंªप ने ईरान के लिए समयसीमा खत्म होने के बीच कड़ी धमकी दी कि समझौता नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो आज की रात पूरी सभ्यता नष्ट हो जायेगी, जो कभी वापस नहीं लाई जा सकेगी। वहीं, ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी कि ऐसा जबाब देंगे, जिसे भूल नहीं सकोगे। उसने बातचीत के सारे रास्ते भी बंद कर दिये। हालांकि इसके बाद, टंªप ने कहा-बातचीत ठीक रही, तो समयसीमा बढ़ायी जा सकती है।
ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशियन ने कहा कि उनके साथ ईरान के 1.4करोड़ नागरिक देश के लिए बलिदान देने के लिए तैयार हैं, इस बीच, अमेरिकी व इस्त्राइली सेनाओं ने ईरान के बुनियादी ढ़ाचों पर हमले शुरू कर दिये और दो पुलों व रेलवे स्टेशन के साथ ही तेल संपन्न खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों का निशाना बनाय।
टंªप ने सोशल मीडिया पर समझौता के उम्मीद भी जताई। कहा-शायद कुछ क्रांतिकारी व अदुभुत हो जाये। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी बेंस ने भी ईरान से सकरात्मक जबाब की उम्मीद जताई। टंªप ने समझौते के लिए ईरान को भारतीय समय बुधवार सुबह 6ः30बजे तक का समय दिया है। समझौता न करने पर ईरानी बिजली संयत्रों व बुनियादी ढ़ांचों को तबाह करने की धमकी दी है।
ईरान के उपखेल मंत्री अजीरेजा रहीमी ने खिलाड़ियों व कलाकारों से बिजली संयत्रों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाने का आहृवान किया। उन्होनें युवाओं, खिलाड़ियों, कलाकारों, छात्रों व शिक्षकों को मंगलवार दोपहर बिजली संयत्रों के पास एकत्र होने के लिए आमंत्रित किया। कहा, ये हमारी सम्पŸिा और साजो-सामान है।
युद्व खत्म होने से पहले ईरानी एटमी क्षमता जड़ से खत्म करने में जुटे अमेरिका-इस्त्राइल
भारतीय किसान मोर्चा पार्टी समाचार।
तेहरान/वाशिगंटन/तेल अवीव। ईरान के खिलाफ युद्व अंतिम चरण की ओर बढ़ता दिख रहा है, लेकिन इससे पहले अमेरिका और इस्त्राइल तेहरान की क्षमता को जड़ से खत्म करना चाहते हैं। परमाणु कार्यक्रम को केवल ठिकानों पर हमले कर कमजोर करना नहीं, बल्कि उसकी हर क्षमता स्थायी रूप से खत्म करना दोनों देशों की रणनीति है।
वैज्ञानिकों को टारगेट किलिंग, विश्वविद्यालायांे और सप्लाई भंडार पर नजर, इन सबके जरिये दोनों देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि युद्व के बाद भी ईरान के पास एटमी हथियार बनाने की क्षमता न बचे। यह रणनीति 2025 से शुरू हुई और मौजूदा युद्व के दौरान आक्रामक हो चुकी है ।






